
अमरावती: तिरुपति के विश्व प्रसिद्ध ‘श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर’ के प्रसादम (लड्डू) में घी की कथित मिलावट का मामला एक बार फिर गरमा गया है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इस मामले की गहन जांच और दोषियों पर कार्रवाई के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल की रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
45 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट
मुख्य सचिव के. विजयानंद द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, दिनेश कुमार समिति घी निविदा (Tender) शर्तों में दी गई ढील, प्रवर्तन में हुई चूक और टीटीडी के उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी जो इस विफलता के लिए जिम्मेदार हैं। समिति को 45 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी।एसआईटी ने 23 जनवरी को अपनी चार्जशीट और सारांश रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी, जिसमें टीटीडी के पूर्व सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी।
विधान परिषद में भगवान की तस्वीरों पर रार
शुक्रवार को आंध्र प्रदेश विधान परिषद में इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दल वाईएसआरसीपी के सदस्यों ने सदन में श्री वेंकटेश्वर स्वामी की तस्वीरें प्रदर्शित कीं, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।विपक्षी सदस्य इंदापुर डेयरी और लड्डू प्रसादम के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे। गौरतलब है कि विपक्ष इंदापुर डेयरी का संबंध मुख्यमंत्री के परिवार की कंपनी ‘हेरिटेज फूड्स’ से जोड़कर आरोप लगा रहा है। वित्त मंत्री पी. केशव ने इसे ‘अपमानजनक’ बताते हुए कहा कि भगवान को राजनीति में घसीटना उचित नहीं है। उन्होंने पूछा, “क्या इन लोगों में भगवान के प्रति कोई गरिमा या डर बचा है?”
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद सितंबर 2024 में तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान लड्डू तैयार करने में पशु वसा युक्त घी का इस्तेमाल किया गया था। इस खुलासे के बाद देश भर के हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचने की बात कहते हुए बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।



