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Rajasthan: बंद फैक्ट्री की आड़ में चल रहा था मौत का खेल, 7 मजदूरों की मौत से दहला खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र

भिवाड़ी (अलवर): राजस्थान के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार दोपहर एक भीषण धमाके ने औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। प्लॉट नंबर G-1, 118 स्थित एक फैक्ट्री, जो कागजों में ‘बंद’ बताई जा रही थी, वहां अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। दोपहर 1 बजे तक इस हृदयविदारक हादसे में 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे में अन्य के दबे होने की आशंका के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

किराए के परिसर में बारूद का काला कारोबार

प्रारंभिक जांच के अनुसार, फैक्ट्री मालिक ने परिसर को किसी अन्य व्यक्ति को किराए पर दे रखा था। किरायेदार ने बिना किसी वैध लाइसेंस या सरकारी अनुमति के यहां भारी मात्रा में बारूद और गत्ता जमा कर रखा था। बारूद के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

3-4 जोरदार धमाकों से थर्राया इलाका

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोपहर करीब 1 बजे एक के बाद एक 3 से 4 भीषण धमाके हुए, जिनकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।धमाकों के डर से आसपास की फैक्ट्रियों के कर्मचारी काम छोड़कर बाहर भाग निकले। सुरक्षा कारणों से आसपास की यूनिट्स को खाली कराकर बिजली आपूर्ति काट दी गई।आधा दर्जन से अधिक दमकल गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

मजदूरों की पहचान और बचाव कार्य

अलवर की एडीएम सुमित्रा मिश्र ने बताया कि अब तक निकाले गए 7 शवों की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है। मृतक मजदूर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। दमकल प्रभारी राजू खान के अनुसार, सुबह 10 बजे से ही धुआं उठना शुरू हो गया था, जिसे गश्त कर रही पुलिस टीम ने सबसे पहले नोटिस किया।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है। लोगों का सवाल है कि जब फैक्ट्री महीनों से रिकॉर्ड में ‘बंद’ थी, तो वहां अवैध गतिविधियां कैसे चल रही थीं?औद्योगिक क्षेत्र में नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?इतनी भारी मात्रा में बारूद का भंडारण रीको और पुलिस की नजरों से कैसे बच गया?

“यह घटना अत्यंत गंभीर और निंदनीय है। फैक्ट्री मालिक और मैनेजर को तलब किया गया है। हम विस्फोटक सामग्री की जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
— आर्तिका शुक्ला, जिला कलेक्टर, अलवर

क्या कहता है कानून?

नियमों के अनुसार, पटाखा निर्माण या भंडारण के लिए पुलिस, फायर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से NOC लेना अनिवार्य है। बिना लाइसेंस के ऐसी गतिविधि चलाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इसमें जेल और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। प्रशासन ने फिलहाल फैक्ट्री को सील कर दिया है।

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