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Jharkhand: एनआईटी जमशेदपुर में पांच दिवसीय ‘एडवांस्ड ईएसडीपी’ संपन्न, आईसीई और इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक से आत्मनिर्भर बनेंगे युवा

जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा प्रायोजित पांच दिवसीय उन्नत उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम का सोमवार को विधिवत समापन हो गया। 12 फरवरी से शुरू हुए इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का मुख्य विषय “स्केलिंग सक्सेस: ऑटो कंपोनेंट्स फॉर आईसीई एंड ईवी इन डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट्स” था।संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सुत्रधर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भविष्य की ऑटोमोबाइल तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन से जोड़ना था।

पारंपरिक इंजन से इलेक्ट्रिक वाहन तक का सफर

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने ऑटोमोबाइल उद्योग के दो सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। जहाँ एक ओर पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन की बारीकियों को समझाया गया, वहीं दूसरी ओर भविष्य की जरूरत यानी इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में तकनीकी बदलावों पर प्रकाश डाला गया।प्रभारी निदेशक प्रो. आर. वी. शर्मा ने उद्घाटन सत्र में कहा कि स्वच्छ गतिशीलता के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ऐसे आयोजन मील का पत्थर साबित होंगे।

दिग्गज विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

पांच दिनों तक चले विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया।डॉ. चंद्रशेखर मालवी और सुश्री ओह्मना सिन्हा: सौर ऊर्जा और वैश्विक बाजार के अवसर।एनआईटी के वरिष्ठ प्राध्यापक: बैटरी प्रबंधन प्रणाली , ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आपूर्ति श्रृंखला।

उद्यमिता के मूल मंत्र: तकनीकी कौशल के साथ बिजनेस विजन

इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि इसमें केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि बिज़नेस मैनेजमेंट पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। एक सफल स्टार्टअप के लिए ठोस ब्लूप्रिंट तैयार करना,घरेलू और निर्यात बाजार में पैठ बनाना और एमएसएमई की योजनाओं और फंडिंग के जरिए उद्योग खड़ा करना।

प्रमाणपत्र वितरण के साथ समापन

समापन समारोह में प्रभारी निदेशक प्रो. रबिन्द्र नाथ महंती और विभागाध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार ने सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समन्वयक डॉ. कनिका प्रसाद, डॉ. ओम हरि गुप्ता और डॉ. के. राघवेन्द्र नाइक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने इस सहयोग के लिए एमएसएमई मंत्रालय और संस्थान प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

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