Jharkhand: झारखंड में अवैध तरीके से नियुक्त DGP के अवैध संपत्ति की जांच हो, वेतन की हो वसूली -बाबूलाल मरांडी

रांची: झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाश सिंह जजमेंट के तहत एक महीने के भीतर यूपीएससी पैनल से डीजीपी नियुक्त करने के निर्देश के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। मरांडी ने वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा को नैतिक आधार पर पद छोड़ने की नसीहत देते हुए पूर्व के डीजीपी रहे अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी मोर्चा खोलने का ऐलान किया है।
“अंधेरगर्दी और मनमानी के खिलाफ मिली जीत”
बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार अब तक डीजीपी की नियुक्ति में कानून को ताक पर रखकर मनमानी कर रही थी। उन्होंने कहा “डीजीपी की नियुक्ति में झारखंड सरकार की अंधेरगर्दी के खिलाफ हमने जो लंबी लड़ाई लड़ी, सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश से उसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।”अब सरकार को एक महीने के भीतर यूपीएससी द्वारा अनुमोदित सूची से ही स्थाई डीजीपी की नियुक्ति करनी होगी।
तदाशा मिश्रा को नसीहत: “स्वतः पद छोड़ें, और फजीहत न कराएं”
वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा पर निशाना साधते हुए मरांडी ने कहा कि रिटायर होने के बाद भी उनका पद पर बने रहना गैर-कानूनी है।मरांडी ने कहा, “तदाशा मिश्रा एक अपेक्षाकृत बेहतर अधिकारी रही हैं, उन्हें अपनी और फजीहत नहीं करानी चाहिए। इससे पहले कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में निकाल बाहर किया जाए, उन्हें स्वतः पद छोड़ देना चाहिए।”उन्होंने आश्चर्य जताया कि आखिर क्यों कोई अधिकारी अपने पूरे कैरियर की साख को रिटायरमेंट के बाद गैर-कानूनी तरीके से पद पर बने रहकर बट्टा लगाना चाहेगा।
वेतन वसूली और संपत्ति जांच की चेतावनी
बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ वर्तमान डीजीपी तक सीमित नहीं है। उन्होंने घोषणा की है कि झारखंड में अब तक जितने भी डीजीपी गलत तरीके से पद पर रहे, उनके द्वारा लिए गए वेतन और अन्य मदों की रकम वसूली जाए।उनके कार्यकाल में किए गए आधिकारिक कार्यों को रद्द कराने की मांग की जाएगी। उन सभी अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए वे हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
“लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि है। सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना ही पड़ेगा। हम झारखंड की पुलिस व्यवस्था को किसी की व्यक्तिगत जागीर नहीं बनने देंगे।”
— बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष



