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Bihar: ई शिक्षा कोष पोर्टल से शिक्षकों का डेटा लीक? फोन पर मिल रही टीचर को धमकी

मुजफ्फरपुर/पटना: बिहार के शिक्षा विभाग के ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि पोर्टल से शिक्षकों का निजी डेटा लीक हो गया है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी शिक्षकों को डराने और उनसे ठगी करने के लिए कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में अकेले मुजफ्फरपुर जिले के 60 से अधिक शिक्षकों को फर्जी एफआईआर की धमकी भरे कॉल आ चुके हैं।

“गलत वीडियो देख रहे हैं, पटना आकर मिलिए”

ठगों का तरीका बेहद शातिराना है। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को पटना के साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताता है। वह शिक्षकों को कॉल कर कहता है “हैलो, आप फलां प्रखंड की शिक्षिका बोल रही हैं ना? ई-शिक्षा कोष एप पर जो आपका नंबर और ईमेल है, उससे गलत साइट्स और वीडियो देखे जा रहे हैं। यह अपराध है। अगर आप कल तक पटना के सेक्टर 132 स्थित साइबर क्राइम ब्रांच आकर नहीं मिलीं, तो आप पर केस दर्ज होगा और कोर्ट जाना पड़ेगा।”शिक्षिकाओं को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर भी डराया जा रहा है। डरे हुए शिक्षकों से मामले को रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जा रही है।

सब-इंस्पेक्टर ‘आकाश वर्मा’ बनकर दे रहा धमकी

पारू और औराई प्रखंड के कई शिक्षकों ने बताया कि कॉल करने वाला शख्स अपना परिचय सब-इंस्पेक्टर आकाश वर्मा के रूप में देता है। वह शिक्षकों का नाम, पदस्थापना की जगह और मोबाइल नंबर तक सही-सही बताता है, जिससे शिक्षक आसानी से झांसे में आ जाते हैं। ठग द्वारा ‘सेक्टर 132’ जैसे पते बताए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में पटना में इस तरह का कोई आधिकारिक सेक्टर मुख्यालय नहीं है।

पूरा डेटा लीक, बीएलओ ठगी के बाद अब नया ट्रेंड

परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के लखन लाल निषाद ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा इससे पहले बीएलओ ड्यूटी के नाम पर ठगी हुई थी। अब ऐसा लगता है कि शिक्षकों का पूरा डेटा (नाम, नंबर, ईमेल, स्कूल का नाम) लीक हो चुका है।कई शिक्षकों ने ठगों के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली है।संघ का कहना है कि अगर सरकारी पोर्टल से डेटा सुरक्षित नहीं है, तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार है।

शिक्षा विभाग और साइबर सेल को आवेदन

पीड़ित शिक्षकों और शिक्षक संघों ने इस मामले में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों और राज्य साइबर सेल को लिखित आवेदन देने का निर्णय लिया है। शिक्षकों ने मांग की है कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए और इस गिरोह का पर्दाफाश किया जाए।

सावधान रहें शिक्षक: साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह

साइबर जानकारों का कहना है कि कोई भी पुलिस अधिकारी फोन पर इस तरह से ‘सेटलमेंट’ की बात नहीं करता।किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।अगर कोई खुद को पुलिस वाला बताकर रुपये मांगे, तो तुरंत स्थानीय थाने या 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें।ई-शिक्षा कोष या किसी भी सरकारी ऐप का पासवर्ड नियमित अंतराल पर बदलते रहें।

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