Jharkhand INFACTNews

Jharkhand: जीत महतो की मौत के 20 दिन बाद भी न्याय शून्य, विकास सिंह बोले-नेताओं ने सिर्फ फोटोशूट कराया

जमशेदपुर: मानगो के गोकुल नगर निवासी 22 वर्षीय जीत महतो की मौत के करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी न्याय की गुहार और आर्थिक मदद के वादे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। इस मामले में मानगो निवासी और भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शहर के जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा किया है। विकास सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद, विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस संवेदनशील मामले का इस्तेमाल केवल ‘फोटोशूट’ और ‘सुर्खियां’ बटोरने के लिए किया।

“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” के नारे पर तंज

विकास सिंह ने कहा कि जिस दिन जीत महतो की नवजात बेटी का जन्म हुआ, उसी दिन उसके सिर से पिता का साया उठ गया। उन्होंने सवाल उठाया कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाले बड़े नेताओं ने अब तक उस बच्ची के भविष्य के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में प्रशासन की गलती थी, तो अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर प्रशासन सही था, तो नेताओं ने सहानुभूति के नाम पर झूठा नाटक क्यों किया?

फोटोशूट की राजनीति और शून्य परिणाम

विकास सिंह ने नेताओं की सक्रियता पर तंज कसते हुए कहा सुबह-सवेरे दरवाजे पर दस्तक देकर यह दिखाने की कोशिश की कि वे परिवार के साथ हैं, लेकिन आर्थिक सहयोग के नाम पर कुछ नहीं मिला।रांची में प्रेस वार्ता तो की, लेकिन उसका परिणाम ‘शून्य’ रहा।गोकुल नगर में सैकड़ों गाड़ियों का काफिला पहुंचा, लेकिन आज जीत महतो की विधवा पत्नी दाने-दाने को मोहताज है।

‘किराए के मकान में अबुआ आवास का सपना’

नेताओं के दावों पर सवाल उठाते हुए विकास सिंह ने कहा कि नेताओं ने बिना भौगोलिक जानकारी लिए पीड़ित परिवार को ‘अबुआ आवास’ दिलाने का झुनझुना थमा दिया। उन्होंने पूछा, “क्या किराए के मकान में रहने वालों का भी अबुआ आवास बनता है? जनता को बेवकूफ बनाने की भी एक हद होती है।” ### “जनप्रतिनिधियों की साख हो रही खत्म” विकास सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि केवल टीवी और अखबारों में चेहरा चमकाने से जनप्रतिनिधियों की साख जनता के बीच खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नेताओं की इस ‘शून्य परिणाम’ वाली राजनीति से उनके साथ चलने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटता है।

नैतिक जिम्मेदारी निभाने की मांग

अंत में विकास सिंह ने मांग की कि जितने भी जनप्रतिनिधियों ने जीत महतो के घर जाकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं, वे अब अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं। वे उस नवजात बच्ची के पालन-पोषण और विधवा पत्नी के स्वावलंबन के लिए ठोस आर्थिक सहयोग सुनिश्चित करें, न कि केवल झूठी संवेदनाओं का प्रदर्शन करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button