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Jharkhand: मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम सौंपा मांग पत्र

जमशेदपुर। केंद्र सरकार द्वारा ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) का नाम बदलने की कथित कवायद के खिलाफ सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शन के पश्चात जिला कांग्रेस कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से देश की राष्ट्रपति को संबोधित एक मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मनरेगा योजना का नाम बदलना न केवल ऐतिहासिक विरासत से छेड़छाड़ है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनभावनाओं का अपमान भी है।

“ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है मनरेगा”

मांग पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने मनरेगा के महत्व को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए जिसमे मनरेगा गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम है।यह योजना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम और उनके आदर्शों से जुड़ी है, जो आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और भरोसे का प्रतीक है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसका नाम बदलना इस ऐतिहासिक कानून की गरिमा को कम करने का प्रयास है।

परविंदर सिंह का केंद्र पर प्रहार

जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नाम बदलने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा “हमें महामहिम राष्ट्रपति पर पूर्ण विश्वास है कि वे जनभावनाओं को समझते हुए इस प्रक्रिया पर अविलंब रोक लगाने का निर्देश देंगी। महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी गरीबों के अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।”

प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल रहे

इस विरोध प्रदर्शन और मांग पत्र सौंपने के दौरान जिला कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।

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