Bihar: समस्तीपुर में बीजेपी नेता की हत्या पर बवाल; सम्राट चौधरी के ‘कचरा साफ’ करने वाले दावे पर आरजेडी का तीखा तंज

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक युवा नेता की नृशंस हत्या के बाद राज्य की सियासत में उबाल आ गया है। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को भी तेज कर दिया है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के अपराधियों को “साफ” करने वाले बयान के चंद घंटों बाद हुई इस वारदात ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार देर शाम समस्तीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र में बीजेपी के पंचायत अध्यक्ष 23 वर्षीय रूपक सहनी अपनी दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान बेखौफ अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। लहूलुहान रूपक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अपराधी वारदात को अंजाम देकर पैदल ही फरार हो गए। इस लापरवाही को लेकर एसपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है।
सम्राट चौधरी का दावा और विपक्ष का हमला
हैरानी की बात यह है कि इस हत्या से कुछ ही घंटे पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सार्वजनिक मंच से हुंकार भरी थी कि बिहार से अपराधियों का “कचरा साफ” किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि अपराधी बिहार छोड़कर भाग रहे हैं और अगले तीन महीनों में राज्य पूरी तरह अपराध मुक्त होगा।इसी बयान को लेकर RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने सरकार घेरा जब नीतीश सरकार अपने ही दल के नेताओं को सुरक्षा नहीं दे पा रही, तो आम जनता का क्या होगा? बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है और जनता भगवान भरोसे है। सम्राट चौधरी का ‘कचरा साफ’ करने वाला दावा हवा-हवाई साबित हुआ है।
बीजेपी का पलटवार: “राजनीति न करे विपक्ष”
इधर, बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रियरंजन पटेल ने कहा, पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।सरकार किसी भी अपराधी को बख्शने वाली नहीं है, पुलिस की कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं हुई है।बीजेपी ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर राजनीति करने के बजाय विपक्ष को जांच का इंतजार करना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर गहराते सवाल
समस्तीपुर की इस घटना ने पुलिसिया तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक ओर सरकार 29 दिसंबर जैसे बड़े कार्यक्रमों की तैयारी और अपराध मुक्त बिहार का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरेआम पार्टी पदाधिकारियों की हत्या ने प्रशासन की चौकसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



