Jharkhand: कांग्रेस की प्रस्तावित रैली पर बाबूलाल मरांडी का निशाना, 1984 के सिख विरोधी नरसंहार और आपातकाल का किया जिक्र

पलामू: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा है। उन्होंने एक नवंबर को रैली आयोजित करने की तारीख पर सवाल उठाते हुए वर्ष 1984 के सिख विरोधी नरसंहार और 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र किया। मरांडी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र और संविधान के प्रति दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

रैली की तारीख पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी। इसके बाद एक नवंबर से देश के विभिन्न हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़की थी। उन्होंने कांग्रेस की प्रस्तावित रैली की तारीख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तय किए जाने चाहिए।मरांडी ने दीपावली सहित अन्य त्योहारों के दौरान सामाजिक माहौल प्रभावित होने की आशंका भी जताई। उन्होंने कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर पार्टी नेतृत्व की मंशा पर सवाल खड़े किए।

आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अमान्य घोषित किए जाने के बाद देश में आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था।मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज लोकतंत्र और संविधान की बात करती है, लेकिन सत्ता में रहते हुए उसका आचरण अलग रहा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति कांग्रेस का रवैया सत्ता की परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहा है।

कांग्रेस पर अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप

बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राजनीतिक रवैये और उसके कार्यक्रमों के पीछे की मंशा को जनता के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है।कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर मरांडी की टिप्पणी से राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। हालांकि, रैली की तारीख और उसके उद्देश्य को लेकर कांग्रेस का पक्ष भी इस राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण रहेगा।

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