Bihar: अनंत सिंह के बाद नीलम देवी पर भी कार्रवाई, 20 सूत्री समिति से हटाया; राज्यमंत्री का दर्जा खत्म

पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की कार्रवाई का सिलसिला जारी है। सोमवार, 26 अक्टूबर को नीलम देवी को 20 सूत्री समिति के सदस्य पद से हटा दिया गया। इसके साथ ही उनका राज्यमंत्री का दर्जा भी समाप्त हो गया। यह कार्रवाई दोनों नेताओं को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के दो दिन बाद हुई है।

20 सूत्री समिति से हटाई गईं नीलम देवी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जदयू की अनुशंसा पर नीलम देवी को 20 सूत्री समिति के सदस्य पद से हटाया गया है। इस पद से जुड़े राज्यमंत्री के दर्जे के भी समाप्त होने की जानकारी सामने आई है।इस कार्रवाई के बाद उनके सरकारी आवास को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, फिलहाल सरकारी बंगला वापस लिए जाने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है।

एमएलसी चुनाव में पार्टी प्रत्याशी का किया था विरोध

जदयू ने शनिवार, 24 अक्टूबर को मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में दल विरोधी गतिविधियों और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना का हवाला दिया गया था।विवाद की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह का खुलकर प्रचार करना था। अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। बताया जाता है कि नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाए जाने से वह नाराज थे।जदयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की अनुशंसा की है। हालांकि, उनकी विधायकी पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

अनंत सिंह ने नई पार्टी बनाने का किया ऐलान

जदयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने अपनी नई पार्टी बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि वह आगे अपनी पार्टी बनाएंगे।अनंत सिंह के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, नीलम देवी को 20 सूत्री समिति से हटाए जाने और राज्यमंत्री का दर्जा समाप्त होने के बाद उनके परिवार पर पार्टी की कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है।फिलहाल, सरकारी बंगले को लेकर किसी फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में आगे सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आदेश जारी होता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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