पटना : बिहार में सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार को लेकर बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने नई पहल की है। उन्होंने शिकायतों और उनसे जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9220599393 जारी किया है। सांसद ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी कार्यालयों में हुए कथित दुर्व्यवहार से संबंधित फोटो, वीडियो और दस्तावेज इस नंबर पर साझा करें।सुधाकर सिंह के मुताबिक, इन सामग्रियों को संकलित कर सरकार के सामने रखा जाएगा। साथ ही, इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद मिलीं शिकायतें
सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से व्हाट्सएप नंबर जारी करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे संपर्क किया है।उनके अनुसार, कई लोगों ने जिलों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों में होने वाले व्यवहार को लेकर शिकायतें साझा की हैं। लोगों ने अधिकारियों से मिलने, अपनी समस्याएं रखने और अपनी बात सुने जाने में आने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया है।
शिकायतों के लिए जारी किया व्हाट्सएप नंबर
सुधाकर सिंह ने सरकारी कार्यालयों में कथित दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों को सामने लाने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9220599393 जारी किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपनी शिकायतों के समर्थन में उपलब्ध फोटो, वीडियो और दस्तावेज साझा करें।सांसद का कहना है कि प्राप्त सामग्री को व्यवस्थित तरीके से संकलित कर सरकार के समक्ष रखा जाएगा, ताकि इस मुद्दे पर ध्यान दिया जा सके।
डीएम-एसपी के व्यवहार की अंग्रेजी हुकूमत से की तुलना
सुधाकर सिंह ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में डीएम और एसपी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी आम लोगों से दूरी बनाकर बात करते हैं और उनके आसपास हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सांसद ने इस व्यवहार की तुलना अंग्रेजी हुकूमत के दौर से की।उन्होंने कहा कि डीएम और एसपी जनता के सेवक हैं, इसलिए उनसे आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
संसद में मुद्दा उठाने की कही बात
सुधाकर सिंह ने कहा है कि सरकारी कार्यालयों में लोगों के साथ होने वाले व्यवहार को गंभीरता से देखने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों से मिलने वाली सामग्री को सरकार के सामने रखने के साथ-साथ वह इस मुद्दे को सदन में भी उठाएंगे।फिलहाल सांसद की इस पहल के तहत मिलने वाली शिकायतों और संबंधित साक्ष्यों पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
