महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सिसवा नगर क्षेत्र में निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबकर तीन किशोरों की मौत के बाद सोमवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और स्थानीय लोगों ने नगरपालिका के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया और जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रशासन के आश्वासन के बाद भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों का अंतिम संस्कार कराया गया।
अंतिम संस्कार से पहले प्रदर्शन
सोमवार सुबह मृतकों के शव घरों के बाहर रखकर परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि केवल निर्माण एजेंसी ही नहीं, बल्कि नगर पालिका परिषद सिसवा के अधिशासी अधिकारी , जूनियर इंजीनियर और चेयरमैन के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जाए। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर कई थानों की पुलिस और पीएसी तैनात की गई।
प्रशासन ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा
कोठीभार थाना प्रभारी अखिलेश कुमार वर्मा, तहसीलदार अमित कुमार सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से वार्ता की। अधिकारियों ने बताया कि कार्यदायी संस्था दीपक कंस्ट्रक्शन के खिलाफ पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है। साथ ही जांच के दौरान यदि नगर पालिका या अन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माणाधीन अमृत सरोवर की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की जांच पहले से जारी है तथा पूरे मामले पर जिलाधिकारी स्वयं निगरानी रख रहे हैं।
रविवार को हुआ था दर्दनाक हादसा
रविवार दोपहर करीब एक बजे मीराबाई नगर के चार किशोर निर्माणाधीन अमृत सरोवर में नहाने गए थे। इस दौरान रोहन (13), नीतीश यादव (12) और कृष्णा रौनियार (15) गहरे पानी और दलदल में फंसकर डूब गए। उनके साथ मौजूद राजवीर (13) किसी तरह बाहर निकल आया और रस्सी के सहारे दोस्तों को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। ग्रामीणों के पहुंचने तक तीनों किशोरों की मौत हो चुकी थी।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतकों में नीतीश कक्षा छह, रोहन कक्षा सात और कृष्णा कक्षा नौ का छात्र था। कृष्णा और रोहन अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भारी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार
प्रशासन के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। खेखड़ा घाट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीनों किशोरों का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ तीन चिताओं के जलने का मार्मिक दृश्य देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माणाधीन स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिसकी वजह से तीन मासूमों की जान चली गई।
