भोपाल: प्रख्यात साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत का शुक्रवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, पत्रकारिता और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके दीर्घ सार्वजनिक जीवन में निष्पक्ष पत्रकारिता, उत्कृष्ट लेखन और समाजसेवा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को सदैव याद किया जाएगा।
महू में हुआ जन्म, साहित्य को समर्पित रहा पूरा जीवन
कैलाशचंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के महू (इंदौर) में हुआ था। उन्होंने एमए, साहित्याचार्य और साहित्य रत्न की उपाधियां प्राप्त कीं। जीवनभर उन्होंने लेखन, संपादन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा की।
हिंदी पत्रकारिता और साहित्य को दी नई दिशा
कैलाशचंद्र पंत ने हिंदी पत्रकारिता और साहित्य को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख कृतियों में कौन किसका आदमी,धुंध के आर-पार,शब्द का विचार पक्ष,संस्कार, संस्कृति और समाज और संकल्प की प्रतीक्षा में जैसी चर्चित पुस्तकें शामिल हैं।इसके अलावा उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन भी किया।
लंबा संपादकीय और पत्रकारिता का सफर
पत्रकारिता की शुरुआत व्याख्याता के रूप में करने वाले कैलाशचंद्र पंत बाद में कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं से जुड़े।उनकी प्रमुख संपादकीय जिम्मेदारियां में साप्ताहिक ‘जनधर्म’ के संपादक (1977–1998) और मासिक पत्रिका ‘अक्षरा’ के संपादक (2006–2021) ।उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नई सोच और दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिंदी भवन न्यास और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से रहा गहरा जुड़ाव
कैलाशचंद्र पंत लंबे समय तक मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और हिंदी भवन न्यास से जुड़े रहे। उनके लेखों और विचारों के अनेक संग्रह हिंदी भवन न्यास की महत्वपूर्ण धरोहर माने जाते हैं।
साहित्यकारों ने जताया शोक
अक्षरा के संपादक एवं मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के मंत्री संचालक डॉ. विकास दवे ने कहा कि कैलाशचंद्र पंत का देश, समाज और हिंदी साहित्य के प्रति योगदान अविस्मरणीय है।वहीं वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल अमृत ने कहा कि पंत जी की उपस्थिति हमेशा सकारात्मक ऊर्जा और आत्मीयता का एहसास कराती थी। उनका निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
