कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पश्चिम बंगाल दौरे के तहत आज उत्तर कोलकाता के प्रसिद्ध ठनठनिया काली मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। मां काली का आशीर्वाद लेने के बाद वे एक भव्य रोड शो का नेतृत्व करेंगे, जिसमें भारी जनसैलाब उमड़ने की उम्मीद है।
मंदिर का गौरवशाली इतिहास
मंदिर का निर्माण सन् 1703 में तांत्रिक उदय नारायण ब्रह्मचारी ने करवाया था।मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां सिद्धेश्वरी की प्रतिमा मिट्टी से बनी है, जिसे स्वयं ब्रह्मचारी जी ने तैयार किया था। जब यह मंदिर बना था, तब यह क्षेत्र गोविंदपुर और सुतानुटी गांवों के घने जंगलों के बीच एक श्मशान भूमि थी। मिट्टी की दीवारें और ताड़ के पत्तों की छत वाला यह मंदिर आज भी भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है।
‘ठनठनिया’ नाम के पीछे की कहानी
इस मंदिर का नामकरण बहुत ही दिलचस्प तरीके से हुआ।उस दौर में जब लोग घने जंगलों के बीच से गुजरते थे, तो मंदिर की घंटी की ‘ठन-ठन’ की आवाज सुनकर उन्हें दिशा और सुरक्षा का आभास होता था। घंटी की इसी निरंतर गूंज के कारण स्थानीय लोगों ने इसका नाम ‘ठनठनिया’ काली मंदिर रख दिया।
जीर्णोद्धार और आध्यात्मिक महत्व
प्रसिद्ध व्यापारी शंकर घोष ने 1806 में इस मंदिर की पुनः स्थापना की और इसे वर्तमान स्वरूप (कालीबाड़ी) दिया। उन्होंने ही परिसर में अष्टचाला शैली के ‘पुष्पेश्वर शिव मंदिर’ का निर्माण कराया।
रामकृष्ण परमहंस का संबंध
19वीं सदी के महान संत रामकृष्ण परमहंस भी इस मंदिर में पूजा-अर्चना कर चुके हैं। उनके प्रत्यक्ष शिष्य स्वामी सुबोधानंद, शंकर घोष के ही पोते थे। आज भी शंकर घोष के वंशज ही मंदिर की सेवा और पूजा का जिम्मा संभाल रहे हैं।
चुनावी रोड शो की तैयारी
प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर उत्तर कोलकाता में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में दर्शन के बाद रोड शो के माध्यम से पीएम मोदी जनता से सीधा संवाद करेंगे, जो राज्य में दूसरे चरण के मतदान से पहले एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
