नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र और पूर्व विधायक अमित जोगी के लिए गुरुवार का दिन राहत भरा रहा। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2003 के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को मिली उम्रकैद की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सुनाया फैसला
जस्टिस जेजे विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की।अदालत ने अमित जोगी की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें फिलहाल जेल जाने (सरेंडर) से राहत दे दी है। इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया था। इनमें से एक याचिका सरेंडर पर रोक से संबंधित थी, जिसे चेंबर में दाखिल किया गया था।
क्या है रामअवतार जग्गी हत्याकांड?
यह मामला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास के सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक है।4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामअवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।सीबीआई की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने अमित जोगी की भूमिका को लेकर कड़ा रुख अपनाया।
कानूनी दांव-पेंच और वर्तमान स्थिति
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था और मामला चेंबर जज के पास भेजने की बात कही थी। हालांकि, गुरुवार को विस्तृत दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सजा पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
अमित जोगी का पक्ष
अमित जोगी शुरू से ही खुद को निर्दोष बताते रहे हैं। उनके वकीलों की दलील है कि इस मामले में उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया गया है और निचली अदालत ने उन्हें पहले ही दोषमुक्त कर दिया था।
