Bihar: दरभंगा बैंक लोन घोटाला मामले में आईओबी के असिस्टेंट मैनेजर और मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 2 करोड़ के गबन का खुलासा

दरभंगा : बिहार के दरभंगा जिले में सरकारी योजनाओं की आड़ में चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के असिस्टेंट मैनेजर और इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। महज चार महीनों के भीतर इस गिरोह ने जाली दस्तावेजों के सहारे लगभग 2 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन कर बैंक और सरकार को चूना लगाया है।
कैसे हुआ सनसनीखेज खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, उसके नाम पर बैंक से 18 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया था, जबकि उसने कभी लोन के लिए आवेदन ही नहीं किया था। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के बीच गहरे सांठगांठ की परतें खुलती चली गईं।
घोटाले का ‘मोडस ऑपेरंडी’: नकली दुकानें और फर्जी मोहरें
आरोपियों ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना जैसी सरकारी सब्सिडी वाली योजनाओं को अपना हथियार बनाया था। मिठाई की दुकान, लेदर फैक्ट्री और अन्य छोटे उद्योगों के नाम पर जाली कागजात और फर्जी मोहरें तैयार की गईं।बैंक के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र पर आरोप है कि उसने बिना किसी फिजिकल वेरिफिकेशन (मौके पर जांच) के फर्जी फील्ड रिपोर्ट लगाई और लोन स्वीकृत कर दिए।स्वीकृत लोन की राशि मास्टरमाइंड विपिन पासवान की कंपनी ‘विपिन एंटरप्राइजेज’ के खाते में ट्रांसफर की जाती थी, जहाँ से इसे गिरोह के सदस्यों के बीच बांट लिया जाता था।
गिरफ्तारी और बरामदगी
साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों रवि राघवेंद्र (असिस्टेंट मैनेजर, IOB) और विपिन पासवान (मास्टरमाइंड) को दबोच लिया है।छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में जाली दस्तावेज, विभिन्न विभागों की फर्जी मोहरें और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं।अब तक जांच में 14 फर्जी खातों की पहचान की जा चुकी है, जिनके जरिए गबन किया गया।
फरार आरोपियों की तलाश और जांच का दायरा
साइबर डीएसपी विपिन बिहारी ने बताया कि इस घोटाले के तार अन्य सरकारी विभागों से भी जुड़े हैं। साजिश में उद्योग विभाग का कर्मी कृष्णा पासवान और बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो फिलहाल फरार हैं।पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की रकम 2 करोड़ से कहीं अधिक हो सकती है। फिलहाल फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम छापेमारी कर रही है।



