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National: गेहूं खरीद के नए नियमों पर ‘महाभारत’, पोर्टल और बायोमेट्रिक के विरोध में ढोल-नगाड़ों के साथ मंडियों में प्रदर्शन

चंडीगढ़/हिसार : हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होते ही नए नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियोफेंसिंग और वाहन ट्रैकिंग जैसे कड़े प्रावधानों के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश भर के किसान सड़कों पर उतर आए। यमुनानगर से लेकर जींद तक, किसानों ने बैलगाड़ियों और ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक तरीके से मंडियों में पहुँचकर सरकार के ‘डिजिटल सिस्टम’ के प्रति अपना आक्रोश जताया।

क्या हैं नए नियम जिनसे नाराज हैं किसान?

सरकार ने इस बार गेहूं खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और दूसरे राज्यों से होने वाली अवैध आवक को रोकने के लिए कई तकनीकी शर्तें जोड़ी हैं। मंडी पहुँचने पर किसान का अंगूठा लगवाना अनिवार्य है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का नंबर, फोटो और जियोफेंसिंग के जरिए लोकेशन की पुष्टि।फसल के मंडी में प्रवेश से लेकर भुगतान तक तीन चरणों में सत्यापन।

“हम किसान हैं, अपराधी नहीं”: किसानों का दर्द

किसानों का आरोप है कि ये नियम उन्हें अपमानित करने वाले और बोझिल हैं। किसान नेता सुरेश कोठ ने कहा, “हमें बार-बार यह साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि हम सच्चे किसान हैं। पोर्टल और बायोमेट्रिक के अनगिनत सवालों ने खेती को ‘महाभारत’ बना दिया है।” सदहुरा मंडी में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग किसान ने व्यथा सुनाई कि पुराने ट्रैक्टर के कागज न होने और बायोमेट्रिक न हो पाने के कारण उनकी फसल तीन दिन से गेट पर लदी खड़ी है। जुलाना मंडी में किसानों ने बैलगाड़ी पर फसल लाकर यह संदेश दिया कि वे तकनीक के नाम पर थोपी जा रही जटिलता को स्वीकार नहीं करेंगे।

राजनीतिक गरमाहट: हुड्डा ने बताया ‘अपराधी जैसा व्यवहार’

पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने सदहुरा मंडी का दौरा कर किसानों की समस्याओं को सुना। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अन्नदाता के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हुड्डा ने इन नियमों को तुरंत रोकने और खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।

शनिवार को हाईवे जाम की चेतावनी

संयुक्त किसान मोर्चा और ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ जैसी किसान समितियों ने इस आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है।विरोध स्वरूप शनिवार को प्रदेश के प्रमुख हाईवे 4 घंटे के लिए जाम किए जाएंगे। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार पिछली गलतियों (2025 में चावल मिलर्स की मिलीभगत) का खामियाजा असली किसानों से वसूल रही है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही से यूपी और बिहार का सस्ता चावल हरियाणा की एमएसपी पर खपाया गया, और अब असली किसानों को नौकरशाही के जाल में फंसाया जा रहा है।

सरकार का तर्क: अवैध घुसपैठ पर लगेगी रोक

दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि 8 अप्रैल तक 75 प्रतिशत गेहूं का बायोमेट्रिक सत्यापन सफलतापूर्वक हो चुका है। प्रशासन के अनुसार, इन कड़े नियमों का उद्देश्य बिचौलियों को रोकना और पड़ोसी राज्यों से आने वाले सस्ते अनाज की अवैध एंट्री को बंद करना है, ताकि हरियाणा के किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिल सके।

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