
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार शाम करीब 6 बजे एक बड़ा हादसा हो गया। यहां स्थित 4 मंजिला अग्रवाल लॉज अचानक भरभरा कर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे का वीडियो पास लगे CCTV कैमरे में भी कैद हो गया है।हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। अब तक राहत-बचाव दल दो लोगों के शव मलबे से बाहर निकाल चुका है। इनमें से एक की पहचान 55 वर्षीय हनुमान दीन यादव के रूप में हुई है।
10 साल पुरानी थी इमारत
जानकारी के अनुसार, यह इमारत करीब 10 साल पुरानी बताई जा रही है। लॉज के बगल में निर्माण कार्य चल रहा था। अचानक इमारत भरभरा कर गिरने से लॉज में ठहरे लोग और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए।
SDRF और प्रशासन की टीम कर रही रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही SDRF और प्रशासन की करीब 100 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंच गई। राहत-बचाव कार्य के लिए 3 क्रेन और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत एक तरफ बने गड्ढे की दिशा में गिर गई, जिससे आसपास का इलाका धूल और धुएं से भर गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घायलों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया
हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अब तक 5 से 6 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को इलाज के लिए शहडोल मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जबकि मृतकों के शव मॉर्च्यूरी में रखे गए हैं।
मौके पर पहुंचे मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, कलेक्टर हर्षल पंचोली और एसपी मोती उर रहमान मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य का जायजा लिया।
दुकानें भी आईं चपेट में
लॉज के गिरने से आसपास की कई दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। घटनास्थल पर करीब 10 से 12 एंबुलेंस तैनात की गई हैं ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी
SDRF की टीम ने मलबे में दबे कोतमा निवासी हनुमान दीन यादव के शव को बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनके शरीर की कई हड्डियां टूट चुकी थीं। शव को बाहर निकालते समय वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए।पुलिस के अनुसार SECL जमुना, कोतमा से भी रेस्क्यू टीम को बुलाया गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मलबे में कितने लोग दबे हुए हैं।
24 घंटे से ज्यादा चल सकता है रेस्क्यू ऑपरेशन
प्रशासन के मुताबिक राहत और बचाव कार्य 24 घंटे से अधिक समय तक चल सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है, जबकि हादसे के कारणों की जांच बाद में की जाएगी।



