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Jharkhand: सुवर्णरेखा नदी में 4 क्विंटल से अधिक मछलियां मृत मिलीं, जांच में जुटा विभाग

जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर से होकर गुजरने वाली सुवर्णरेखा नदी में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला मंजर सामने आया। भुइंयाडीह स्थित लाल भट्ठा नदी किनारे स्लम बस्ती के पास भारी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 4 क्विंटल से अधिक मछलियां मरकर किनारे लग गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी चिंता व्याप्त है।

सुबह नदी किनारे दिखा खौफनाक मंजर

बुधवार तड़के जब बस्ती के लोग दैनिक कार्यों के लिए नदी किनारे पहुँचे, तो उन्होंने पानी की सतह और किनारे पर मरी हुई मछलियों का अंबार देखा। मृत मछलियों का वजन 250 ग्राम से लेकर 1.5 किलोग्राम तक बताया जा रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जितनी मछलियां किनारे पर दिख रही हैं, वास्तविक संख्या उससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मछलियां बहाव के साथ आगे निकल गई होंगी।

खरकई और औद्योगिक कचरा

सुवर्णरेखा नदी में मछलियों की सामूहिक मौत के पीछे प्रदूषण के बढ़ते स्तर को मुख्य कारण माना जा रहा है। चांडिल डैम से छोड़ा गया पानी करीब 30 किमी बहने के बाद खरकई नदी में मिलता है।आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला रासायनिक और प्रदूषित पानी खरकई के माध्यम से सुवर्णरेखा में मिल जाता है, जिससे पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों में तापमान बढ़ने और कचरे के जमाव के कारण नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

सेहत के लिए बड़ा खतरा: विशेषज्ञों की चेतावनी

नदी किनारे मरी हुई मछलियों को देखने के बाद लोग उन्हें पकड़ने और खाने की तैयारी में भी दिखे, जिस पर विशेषज्ञों ने सख्त चेतावनी दी है।। यदि मौत केवल ऑक्सीजन की कमी से हुई है, तो जोखिम कम है।यदि किसी फैक्ट्री के जहरीले रसायन के कारण यह घटना हुई है, तो इन मछलियों का सेवन इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इससे फूड पॉइजनिंग या अंगों के फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

प्रशासन से जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से पानी के नमूने लेने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। घटना के बाद पूरे इलाके में दुर्गंध फैलने की भी शिकायत मिल रही है, जिससे महामारी का खतरा बढ़ गया है।

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