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Bihar: नालंदा में गूंजे ‘जय निशांत-तय निशांत’ के नारे, नीतीश को दिल्ली जाने से पहले उत्तराधिकारी चुनने की मांग

नालंदा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में गुरुवार को आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक नया सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। सभा में नीतीश समर्थकों और जदयू कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की पुरजोर मांग की। ‘जय निशांत, तय निशांत’ के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा, जिससे राज्य की भावी राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

“नीतीश के बिना विधवा जैसी होगी बिहार की हालत”

सभा में शामिल महिलाओं और बुजुर्ग कार्यकर्ताओं का दर्द छलक पड़ा। लोगों ने भावुक होते हुए कहा कि नीतीश कुमार के बिना बिहार की स्थिति वैसी ही हो जाएगी जैसे पति के बिना किसी महिला की हालत होती है। समर्थकों ने ’25 से 30 फिर से नीतीश’ के पुराने नारे की याद दिलाते हुए कहा कि हमने उन्हें 2030 तक के लिए चुना है, वे बीच में बिहार छोड़कर दिल्ली (केंद्र की राजनीति) न जाएं। भीड़ में से आवाज उठी कि यदि नीतीश कुमार का दिल्ली जाना अनिवार्य है, तो वे अपनी कुर्सी सुरक्षित हाथों में यानी निशांत कुमार को सौंप कर ही जाएं।

जदयू के दिग्गजों ने भी मांगा ‘निशांत’ के लिए आशीर्वाद

निशांत कुमार को लेकर केवल जनता ही नहीं, बल्कि जदयू के बड़े नेता भी मुखर दिखे।मुख्य प्रवक्ता ने मंच से सार्वजनिक रूप से निशांत कुमार के लिए जनता का आशीर्वाद मांगा।रामप्रीत मंडल (सांसद) ने कहा कि निशांत कुमार सीएम या डिप्टी सीएम, किसी भी पद के योग्य हैं और वे इसे बखूबी संभाल सकते हैं। गौरतलब है कि बाहुबली नेता अनंत सिंह पहले ही निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत कर चुके हैं।

जब पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा

निशांत कुमार के समर्थन में नारेबाजी इतनी उग्र हो गई कि जब नीतीश कुमार खुद भाषण देने उठे, तब भी लोग शांत नहीं हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा। जनता का सीधा सवाल था कि नीतीश कुमार ने 2030 तक सेवा का वादा किया था, तो अब वे बिहार को बीच राह में क्यों छोड़ रहे हैं।

निशांत ने मंदिर में टेका माथा

जदयू की सदस्यता लेने के बाद से निशांत कुमार लगातार चर्चा में हैं। गुरुवार को उन्होंने पटना के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में पूजा-अर्चना की।निशांत ने बिहार की उन्नति, प्रगति और शांति के लिए मां से आशीर्वाद मांगा। उनकी यह बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत दे रही है कि वे अब पर्दे के पीछे रहने के बजाय मुख्यधारा की राजनीति में लंबी पारी खेलने को तैयार हैं।

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