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Delhi: दिल्ली के अक्षरधाम में कल होगी भगवान स्वामीनारायण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, जोरों पर तैयारी

नई दिल्ली : देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर, दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर, कल गुरुवार (26 मार्च) को एक वैश्विक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। BAPS संस्था के वर्तमान प्रमुख ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज के सानिध्य में भगवान स्वामीनारायण के ‘तपोमूर्ति’ स्वरूप (श्रीनीलकंठ वर्णी) की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

विश्व की पहली ऐसी प्रतिमा: एक चरण पर अडिग तपोमूर्ति

पंचधातु से निर्मित यह प्रतिमा कला और भक्ति का अद्भुत संगम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दुनिया की पहली इतनी विशाल प्रतिमा है, जो भगवान के कठिन तप को दर्शाते हुए ‘एक चरण’ पर खड़ी है। यह स्वरूप भगवान स्वामीनारायण की उस कठिन तपस्या को दर्शाता है, जो उन्होंने पुलहाश्रम (मुक्तिनाथ, नेपाल) में चार महीने तक एक पैर पर खड़े होकर की थी। 8 फीट ऊंचे आधार पर स्थापित इस प्रतिमा को बनाने में करीब एक साल का समय लगा। इसमें मुख्य रूप से कांस्य सहित पंचधातु का उपयोग किया गया है। इसे अक्षरधाम के शिल्पी संतों, 50 से अधिक कुशल कारीगरों और स्वयंसेवकों ने मिलकर तैयार किया है।

विश्व शांति महायज्ञ के साथ महोत्सव का शुभारंभ

प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत आज बुधवार को ‘श्रीनीलकंठ वर्णी विश्व शांति महायज्ञ’ के साथ हुई।अक्षरधाम प्रांगण में षोडशोपचार विधि से पूजन संपन्न हुआ।महंतस्वामी महाराज ने संपूर्ण विश्व में एकता की स्थापना और युद्धों की समाप्ति की मंगलकामना करते हुए आकाश में सफेद कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया। इस समारोह में अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 300 से अधिक संत और महंत शामिल हुए हैं।

कौन हैं श्रीनीलकंठ वर्णी?

भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में गृहत्याग कर 7 वर्षों तक पूरे भारत की आध्यात्मिक यात्रा की थी। 12,000 किलोमीटर से अधिक की इस यात्रा के दौरान उन्होंने ‘नीलकंठ वर्णी’ नाम धारण किया। उन्होंने हिमालय से लेकर रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी से लेकर द्वारका तक के तीर्थों को पावन किया। यह प्रतिमा उन्हीं के त्याग, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है।

कल सुबह 6 बजे से मुख्य अनुष्ठान

महोत्सव का मुख्य आकर्षण कल गुरुवार (26 मार्च) को होगा।सुबह 6:00 बजे से मुख्य प्रतिष्ठा विधि प्रारंभ होगी।विधि विधान के बाद प्रतिमा का भव्य लोकार्पण किया जाएगा, जिसके बाद यह दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगी।

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