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Maharashtra: महाराष्ट्र में धर्म स्वतंत्रता बिल पेश, धर्मांतरण के बाद हुई शादी तो पैदा हुए बच्चे का क्या होगा धर्म?

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधानसभा में ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश कर दिया है। यह बिल न केवल जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है, बल्कि इसमें शादी और बच्चों के अधिकारों को लेकर ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो इसे देश के अन्य राज्यों के कानूनों से कहीं अधिक सख्त और व्यापक बनाते हैं।

बच्चों के अधिकार और उत्तराधिकार पर बड़ा फैसला

विधेयक के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में अवैध धर्मांतरण के आधार पर हुई शादियों से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित किया गया है। यदि अवैध धर्मांतरण के जरिए हुई शादी से बच्चा पैदा होता है, तो उसे मां के मूल धर्म (शादी से पहले का धर्म) का माना जाएगा। ऐसे बच्चे को माता-पिता दोनों की संपत्ति में उत्तराधिकार और भरण-पोषण का पूर्ण अधिकार मिलेगा।अदालत के किसी अन्य आदेश तक बच्चे की कस्टडी सामान्यतः मां के पास ही रहेगी।

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सजा के सख्त प्रावधान: जेल और भारी जुर्माना

नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए विधेयक में कड़ी सजा का खाका तैयार किया गया है जिसमे सामान्य मामला में 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना महिला, नाबालिग, SC/ST के मामले में जुर्माना 5 लाख रुपये तक हो सकता है।दो या अधिक लोगों के एक साथ धर्मांतरण पर और भी सख्त सजा होगी।यदि कोई व्यक्ति फिर से यही अपराध करता है, तो उसे 10 साल की जेल और 7 लाख रुपये तक जुर्माना भरना होगा।

शिकायत कौन दर्ज करा सकता है?

विधेयक में पुलिस को शिकायत दर्ज करने के लिए बाध्यकारी नियम दिए गए हैं इसमे पीड़ित स्वयं, उसके माता-पिता, भाई-बहन या कोई भी रक्त संबंधी शिकायत दर्ज करा सकता है।बिल में जबरन धर्मांतरण के शिकार लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा का भी विशेष प्रावधान रखा गया है।

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