जमशेदपुर।सुजीत नारायण प्रसाद (वरीय न्यायाधीश, झारखंड हाई कोर्ट) तथा झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के अध्यक्ष ने समाज में बढ़ती डायन हत्या, बच्चों के गायब होने, यौन उत्पीड़न और नशे की तस्करी में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।वे सिदगोड़ा टाउन हॉल में झालसा और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत और राज्य स्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर के उद्घाटन के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
डायन हत्या अंधविश्वास, इसे रोकना जरूरी
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि डायन हत्या जैसी कुरीतियों को समाज से जल्द खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह अंधविश्वास है और आज किसी अन्य महिला के साथ हो रही ऐसी घटना भविष्य में किसी के साथ भी हो सकती है।
गायब बच्चों के मामलों को बताया गंभीर
उन्होंने कहा कि काम के लिए बाहर जाने वाले या अचानक गायब हो जाने वाले बच्चों के मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। कई परिवार अपने बच्चों को रोजगार के लिए बाहर भेजते हैं, लेकिन इस बात पर भी नजर रखें कि उनका शोषण न हो।उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे बच्चों के मिलने के बाद उनके पुनर्वास की व्यवस्था प्रशासन को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से करनी चाहिए, ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले और पलायन रुके।
यौन उत्पीड़न के मामलों को छिपाना भी अपराध
जस्टिस प्रसाद ने कहा कि बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों को छिपाना भी कानूनन अपराध है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
नशे की तस्करी में बच्चों के इस्तेमाल पर चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी में बच्चों को शामिल किए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। ऐसे मामलों की जानकारी मिलते ही तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों का भविष्य खराब हो सकता है।
कई अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन
इससे पहले जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अरविंद पांडे, कर्ण सत्यार्थी और ऋषभ गर्ग के साथ दीप प्रज्वलित कर शिविर का उद्घाटन किया।इस अवसर पर जस्टिस प्रसाद ने राज्य के सभी जिलों में डालसा की ओर से आयोजित विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया।
लाभुकों को वितरित की गई सहायता
कार्यक्रम के दौरान कई लाभुकों को मुआवजा और सरकारी योजनाओं के चेक प्रदान किए गए। कुल मिलाकर 1 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया।
