Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ईडी अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर की अब सीबीआई करेगी जांच

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की तहकीकात शुरू करने का आदेश दिया है।

24 फरवरी को सुरक्षित रखा गया था फैसला

अदालत ने इस मामले में लंबी बहस के बाद 24 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। इस कानूनी लड़ाई में दोनों ओर से दिग्गजों ने पक्ष रखा।प्रवर्तन निदेशालय की ओर से एसजीआई एस.वी. राजू और अधिवक्ता ए.के. दास और राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु और महाधिवक्ता राजीव रंजन।

क्या है पूरा विवाद? (एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026)

यह मामला पेयजल घोटाले से जुड़ा है, जिसमें संतोष कुमार नामक व्यक्ति पर करीब 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है।ईडी के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को जब संतोष कुमार पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय पहुंचे, तो वह अचानक उत्तेजित हो गए। एजेंसी का दावा है कि संतोष ने खुद ही एक जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया जिससे उन्हें हल्की चोट आई। इसके विपरीत, संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज करा दिया था।ईडी ने इस एफआईआर को रद्द करने और मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट के आदेश के मायने

हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य पुलिस की जांच पर फिलहाल रोक लग गई है। अदालत ने माना कि मामले में केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों की संलिप्तता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना न्यायसंगत होगा।एजेंसी ने अदालत से यह भी अपील की थी कि शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने और जांच में बाधा डालने के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए। अब सीबीआई इन तमाम पहलुओं की गहराई से जांच करेगी।

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