रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को रामनवमी के जुलूस में डीजे पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भारी हंगामा हुआ। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सदन के बाहर और भीतर पोस्टर-बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दल ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए इस पाबंदी को भेदभावपूर्ण बताया।
“सिर्फ हिंदू त्योहारों पर ही पाबंदी क्यों?” – विधायक रौशन लाल चौधरी
बड़कागांव के विधायक रौशन लाल चौधरी ने सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा जब हिंदुओं का त्योहार आता है, तभी सरकार को माहौल बिगड़ने का डर क्यों सताता है? रामनवमी जुलूस में डीजे पर रोक लगाई जाती है, लेकिन मुहर्रम या अन्य मौकों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं दिखती। क्या शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ एक समुदाय की है? सरकार पूरी तरह तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
हजारीबाग रामनवमी पर विशेष फोकस
विपक्षी विधायकों ने विशेष रूप से हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे पर लगी रोक का मुद्दा उठाया। विधायकों का कहना था कि रामनवमी झारखंड की सांस्कृतिक पहचान है और डीजे पर रोक लगाकर भक्तों के उत्साह को दबाया जा रहा है। विधायक सदन के बाहर हाथों में कटआउट और सरकार विरोधी नारे लिखे बैनर लेकर धरने पर बैठ गए।
सरकार का जवाब: “यह हाई कोर्ट का आदेश है”
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मंत्री हाफिजुल हसन ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि डीजे पर रोक राज्य सरकार की व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि कानूनी बाध्यता है। मंत्री ने कहा, “झारखंड हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। यह आदेश सभी धार्मिक जुलूसों और आयोजनों पर समान रूप से लागू है।”उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी भी विशेष समुदाय को छूट देकर अदालत की अवमानना नहीं कर सकता।
सदन में दिखा ‘नारेबाजी और पोस्टर’ का दौर
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी दल की मांग है कि रामनवमी जैसे महापर्व पर परंपराओं का निर्वहन करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
