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Uttar Pradesh: लखनऊ विश्वविद्यालय में नमाज के जवाब में हनुमान चालीसा पाठ पर अड़े छात्र, पुलिस ने घसीटकर गाड़ी में भरा

लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर इन दिनों नफरत और वैचारिक जंग की प्रयोगशाला बनता नजर आ रहा है। कैंपस में लगातार तीसरे दिन धार्मिक गतिविधियों को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। सोमवार को नमाज और इफ्तार के आयोजन के बाद, मंगलवार को दूसरे गुट के छात्र ‘कैंपस के शुद्धीकरण’ के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करने पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने छात्रों को गाड़ी में ठूसा, जमकर हुई धक्का-मुक्की

छात्र नेता जतिन शुक्ला की अगुवाई में दर्जनों छात्र हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए इकट्ठा हुए थे। इससे पहले कि पाठ शुरू होता, भारी संख्या में तैनात पुलिस बल और प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जब छात्र नहीं माने और पाठ शुरू किया, तो पुलिस ने उन्हें पकड़-पकड़कर पुलिस वैन में ठूंसना शुरू कर दिया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की भी हुई।

छात्रों का सवाल: “नमाज पर नरमी, चालीसा पर सख्ती क्यों?”

प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन दोहरा मापदंड अपना रहा है। छात्रों का कहना है जब कैंपस में नमाज पढ़ी गई और इफ्तार पार्टी हुई, तब प्रशासन खामोश रहा। लेकिन जब हम अपनी आस्था व्यक्त करने आए, तो हमारे खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई जा रही है। छात्रों ने एक पोस्टर भी जारी किया था जिसमें कैंपस के ‘शुद्धीकरण’ की बात कही गई थी।

लाल बारादरी बना विवाद का केंद्र

विवाद की जड़ ऐतिहासिक धरोहर लाल बारादरी है। छात्र गुटों का आरोप है कि रविवार को नमाज और इफ्तार के दौरान इस ऐतिहासिक इमारत को क्षतिग्रस्त किया गया। जतिन शुक्ला ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि धरोहर को नुकसान पहुँचाने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए।

सियासी एंट्री: इमरान प्रतापगढ़ी ने जताई आपत्ति

इस पूरे मामले में अब राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने फेसबुक पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस को नफरत की प्रयोगशाला न बनाए और छात्रों के लिए जगह को खोल दिया जाए।

परिसर में भारी पुलिस बल (छावनी में तब्दील एलयू)

वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर किसी छावनी से कम नजर नहीं आ रहा है।प्रशासनिक भवन से लाल बारादरी तक पीएसी और भारी पुलिस बल की तैनाती है।अधिकारियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।छात्रों के मार्च को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर घेराबंदी की गई है।

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