
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मुद्दा गरमाया रहा। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया। शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल बाधित हुआ और सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
22 मौतों पर 44 लाख का मुआवजा: सरकार का जवाब
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से भागीरथपुरा कांड में हुई मौतों और राहत राशि पर सवाल किया।स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया के मामले बढ़े थे। अब तक कुल 22 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनके परिजनों को 2-2 लाख रुपये के मान से कुल 44 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। उमंग सिंघार ने तर्क दिया कि अन्य हादसों की तरह इस मामले में भी 4-4 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय और महापौर के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में कहा कि सरकार ने इस मामले में पूरी संवेदनशीलता दिखाई है और एक प्रशासनिक अधिकारी को निलंबित भी किया गया है। हालांकि, विपक्ष मुख्यमंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने नैतिकता के आधार पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर महापौर के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस सदस्यों ने कफ सिरप मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे पर भी जोर दिया।
सदन में ‘भजन’ और ‘यूनियन कार्बाइड’ का जिक्र
हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा विधायकों ने कांग्रेस के शासनकाल के दौरान हुए यूनियन कार्बाइड (भोपाल गैस त्रासदी) का जिक्र कर पलटवार किया।हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक सदन के बीचों-बीच (आसंदी के पास) जमीन पर बैठ गए और भजन गाने लगे।उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष जनता की आवाज उठाता है, तो उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं।
अध्यक्ष की व्यवस्था और स्थगन
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने व्यवस्था दी कि जो मामले न्यायालय या आयोग के समक्ष विचाराधीन हैं, उन पर मर्यादित प्रश्न ही किए जाएं। लेकिन लगातार नारेबाजी और दोनों पक्षों के आमने-सामने आ जाने के कारण अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पहले 10 मिनट और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।



