Jharkhand: सऊदी अरब में क्रॉसफायरिंग का शिकार हुए झारखंड के मजदूर का शव चार माह बाद पहुंचा रांची, मुआवजे के लिए परिजनों का गिरिडीह में आंदोलन

रांची/गिरिडीह: विदेश में रोजी-रोटी कमाने गए झारखंड के एक और लाल की जान चली गई। सऊदी अरब में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में गिरिडीह जिले के डुमरी निवासी विजय कुमार महतो की गोली लगने से मौत हो गई। घटना के करीब चार महीने बाद, रविवार (15 फरवरी) को उनका पार्थिव शरीर रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट लाया गया, लेकिन परिजनों ने शव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
4 महीने पहले हुई थी क्रॉसफायरिंग में मौत
जानकारी के अनुसार, गिरिडीह के डुमरी प्रखंड निवासी विजय कुमार महतो सऊदी अरब में मजदूरी करते थे। 15 अक्टूबर 2025 को वहां की स्थानीय पुलिस और एक गिरोह के बीच मुठभेड़ हो गई। इस क्रॉसफायरिंग की चपेट में आने से विजय महतो को गोली लग गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों को इसकी सूचना 24 अक्टूबर को मिली थी।
मुआवजे पर अड़े परिजन, मोर्चरी में रखा गया शव
लंबी कानूनी प्रक्रिया और प्रयासों के बाद कल विजय का शव रांची लाया गया। एयरपोर्ट पर शव पहुंचने के बाद परिजनों ने उसे लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि जब तक कंपनी या संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट और उचित मुआवजे का आश्वासन नहीं मिलता, वे शव नहीं लेंगे। फिलहाल, शव को रांची स्थित रिम्स की मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया है, जबकि गिरिडीह में परिजनों और ग्रामीणों का आंदोलन जारी है।
क्या कहता है श्रम विभाग और प्रशासन?
झारखंड राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की टीम प्रमुख शिखा लकड़ा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया। यह मामला वर्तमान में सऊदी अरब की अदालत में विचाराधीन है। कंपनी से मिलने वाला अंतिम मुआवजा कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार के नियमों के तहत, मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने के बाद मृतक के आश्रितों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
गिरिडीह में प्रदर्शन और वार्ता
मृतक के घर डुमरी में तनाव का माहौल है। राज्य प्रवासी नियंत्रण के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन परिजनों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं। परिजनों की मांग है कि विदेश में हुई इस आकस्मिक मृत्यु पर उन्हें ठोस वित्तीय सुरक्षा मिले।
“हमारा बेटा कमाने गया था और वहां की पुलिस की गोलीबारी में मारा गया। हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित में मुआवजे की जानकारी चाहिए। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हम शव नहीं उठाएंगे।”
— मृतक के परिजन



