Jharkhand: सीएम हेमंत सोरेन पहुंचे पैतृक गांव नेमरा, आदिवासी परंपरा के अनुसार नए ‘पाहन’ के चयन पर ग्रामीणों से किया संवाद

रामगढ़: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को अपने पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) पहुंचे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह से अपनी जड़ों और आदिवासी परंपराओं से जुड़ा रहा। वे यहां गांव के नए पाहन (पारंपरिक धार्मिक प्रमुख) के चयन के सिलसिले में आयोजित महत्वपूर्ण ग्राम बैठक में शामिल होने आए थे।
क्यों खास है पाहन का चयन?
आदिवासी संस्कृति में ‘पाहन’ का पद अत्यंत महत्वपूर्ण और सम्मानजनक होता है। पाहन गांव की समस्त धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं। नेमरा गांव के पूर्व पाहन श्याम लाल सोरेन के निधन के बाद यह पद रिक्त हो गया था। परंपरा के अनुसार, नए पाहन का चयन ग्रामीणों की आपसी सहमति और रीति-रिवाजों के आधार पर किया जाता है।
मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन ने सुनी ग्रामीणों की राय
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक आम ग्रामीण की तरह अपनों के बीच बैठे नजर आए। उनके साथ उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने नए पाहन के चयन की प्रक्रिया में भाग लेते हुए ग्रामीणों की राय सुनी। उन्होंने जोर दिया कि चयन की यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक गरिमा और पूर्वजों द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही।हेलिपैड से बैठक स्थल तक सुरक्षा बलों की सघन तैनाती की गई थी। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम की कमान संभाली ताकि पारंपरिक आयोजन बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
जड़ों से जुड़ाव का संदेश
मुख्यमंत्री का यह दौरा राजनीतिक न होकर विशुद्ध रूप से पारिवारिक और सांस्कृतिक रहा। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर मुख्यमंत्री ने यह संदेश दिया कि वे चाहे जिस भी पद पर हों, अपनी पैतृक परंपराओं और गांव के प्रति उनकी जवाबदेही सर्वोपरि है।



