Delhi: खुले मेनहोल में गिरने से बिहार के मजदूर की मौत, घर लौटने की तैयारी में था बिरजू कुमार

दिल्ली। दिल्ली के रोहिणी स्थित बेगमपुर इलाके में खुले मेनहोल में गिरने से बिहार के एक प्रवासी मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय बिरजू कुमार के रूप में हुई है, जो बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला था। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि सिस्टम की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा
यह घटना रोहिणी सेक्टर-32 स्थित महाशक्ति काली मंदिर के पास की है। जानकारी के अनुसार सड़क पर चलते समय बिरजू अचानक खुले मेनहोल में गिर गया। मंगलवार देर शाम दिल्ली फायर ब्रिगेड को सूचना मिली, जिसके बाद कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद उसका शव बरामद किया गया।शव को अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को गांव भेजे जाने की संभावना है।
घर लौटने की तैयारी कर रहा था बिरजू
बिरजू कुमार समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड अंतर्गत लखनपट्टी पंचायत के सादीपुर बथनाहा गांव का निवासी था। वह पिछले 8 महीनों से दिल्ली में सेंटरिंग का काम कर रहा था। हाल ही में उसे कुछ पैसे मिले थे और वह घर लौटने की तैयारी में था।बताया गया है कि वह बाजार से मां, पत्नी और बच्चों के लिए नए कपड़े भी खरीदकर लाया था।
बचपन से संघर्षों भरी जिंदगी
बिरजू के पिता का निधन तब हो गया था, जब वह मात्र 10 साल का था। इसके बाद उसकी मां गीता देवी ने मजदूरी कर उसे और उसकी बहन को पाला। गरीबी में पला-बढ़ा बिरजू कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर हो गया।गांव में रोजगार नहीं मिलने पर वह परदेस कमाने गया था, ताकि परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सके।
परिवार में मातम, नहीं जला चूल्हा
हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया।बिरजू के पीछे उसकी बूढ़ी मां गीता देवी,पत्नी सुचिता देवी,बेटे आयुष (8) और आर्यन (5),बेटी रिया (3) को बेसहारा छोड़ गया है।परिजनों का कहना है कि मंगलवार की रात से घर में चूल्हा तक नहीं जला है।
सरकार से मदद की गुहार
परिजनों ने सरकार से तत्काल विशेष सहायता, मुआवजा और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि परिवार किसी तरह आगे का जीवन जी सके।
खुले मेनहोल पर सवाल
यह हादसा एक बार फिर खुले मेनहोल और शहरी लापरवाही की भयावह तस्वीर पेश करता है। हर साल इस तरह की घटनाओं में गरीब मजदूर और आम लोग अपनी जान गंवाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब भी दूर है।



