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यूनुस सरकार ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण का बनाया दबाव, तो भारत ने दिया जवाब- बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए हम…

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है। जिसके बाद बांग्लादेश ने भारत को हसीना को सौंपने की मांग की है, इसको लेकर भारत की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत के MEA ने क्या जवाब दिया, पढ़ें…

India Responds on Sheikh Hasina Death Sentence: बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को प्रत्यार्पण करने की मांग की थी, इसको लेकर भारत ने पहली प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का दोषी पाया गया है। सोमवार को बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल यानी ICT ने हसीना को फांसी की सजा सुनाई। वह पिछले साल ढाका छोड़कर भारत आई थीं और पिछले 15 महीनों से दिल्ली के एक सेफ हाउस में रह रही हैं।

बांग्‍लादेश ने भारत सरकार से की अपील, लेकिन क्‍या ये संभव है ?

भारत विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में हाल ही में आए फैसले के संबंध में एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया कि, ‘भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में ‘बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’ द्वारा सुनाए गए फैसले पर ध्यान दिया है। एक निकट पड़ोसी होने के नाते, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों जैसे कि जिसमें देश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता शामिल है, के लिए प्रतिबद्ध है। हम इस दिशा में सभी हितधारकों के साथ हमेशा रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।’

‘शेख हसीना को हमें सौंप दे भारत’

बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को प्रत्यर्पित करने का आग्रह किया है। दोनों को पिछले साल एक छात्र विद्रोह के खिलाफ कार्रवाई में उनकी भूमिका के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। बांग्लादेश की तरफ से कहा गया कि प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत ऐसा करने के लिए बाध्य है। पिछले साल हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद भागी शेख हसीना तब से भारत में हैं।


1400 से ज्यादा लोगों की गई थी जान…

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई से लेकर 5 अगस्त, 2024 के बीच बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों में 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए थे और हजारों लोग घायल हुए थे। इनमें से ज्यादातर लोग सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारे गए, जो 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद से बांग्लादेश में सबसे भीषण हिंसा थी।

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