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Bihar: रांची-पटना ‘सरकारी बस’ से ढोई जा रही थी शराब, 252 बोतलो के साथ सरकारी ड्राइवर और खलासी गिरफ्तार

पटना: बिहार में पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाने के सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। इस बार शराब तस्करी का जरिया कोई निजी वाहन नहीं, बल्कि खुद बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की सरकारी बस बनी है। पटना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए रांची से पटना आ रही सरकारी बस से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की है। इस मामले में पुलिस ने बस के ड्राइवर और खलासी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

सरकारी बस की डिक्की में छिपा था ‘मयखाना’

जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि रांची से आने वाली सरकारी बस का उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा है। नाकाबंदी कर जब बस की तलाशी ली गई, तो पुलिस भी दंग रह गई। बस के डिक्की बॉक्स में छिपाकर रखी गई 252 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई। पुलिस के मुताबिक, बरामद शराब की कुल मात्रा 171 लीटर आंकी गई है।

सरकारी कर्मचारी ही निकले शराब तस्कर

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्तार दोनों व्यक्ति सरकारी कर्मचारी हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रमोद कुमार: पिता- रामप्रकाश तिवारी, निवासी- रांची (बस चालक)और कुमार यशपाल: पिता- प्रताप नारायण सिंह, निवासी- भोजपुर (खलासी)।पुलिस ने दोनों के खिलाफ मद्य निषेध कानून की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है कि वे यह खेप किसे सप्लाई करने वाले थे।

शराबबंदी की विफलता पर उठे सवाल

बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकारी बस का तस्करी में इस्तेमाल होना पुलिस और परिवहन विभाग के प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आए दिन पुलिस और तस्करों की मिलीभगत की खबरें सामने आती रहती हैं, जिससे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई जारी

पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस तस्करी के पीछे विभाग के कुछ और लोग भी शामिल हैं। परिवहन निगम ने भी दोनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं।

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