Jharkhand INFACTNews

Jharkhand: हिजला मेला की तिथि में हुआ संशोधन, अब 20 फरवरी के बदले 13 फरवरी से शुरू होगा मेला

दुमका: झारखंड की उपराजधानी दुमका के गौरव और सांस्कृतिक पहचान, राजकीय जनजातीय हिजला मेला की तिथि में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया कि अब यह ऐतिहासिक मेला 13 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

क्यों बदली गई मेला की तिथि?

पूर्व में हिजला मेला का आयोजन 20 फरवरी से 27 फरवरी तक निर्धारित था। हालांकि, राज्य में नगर निकाय चुनाव की तिथियों की घोषणा होने के बाद, निर्वाचन प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मेले की अवधि को संशोधित कर पहले आयोजित करने का फैसला लिया है। डीसी ने सभी विभागों को नई समय-सारणी के अनुसार तैयारियां युद्धस्तर पर पूरी करने का निर्देश दिया है।

सुरक्षा और सुविधाओं पर डीसी का सख्त निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने मेले के सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए कई बिंदुओं पर चर्चा की जिसमे मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल आपूर्ति, निर्बाध विद्युत व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया। हिजला मेला क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्गों पर सुगम यातायात और पार्किंग के लिए अग्निशमन एवं ट्रैफिक पुलिस को विशेष योजना बनाने को कहा गया है।

लोक संस्कृति का दिखेगा संगम

उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने बताया कि मेले के दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसमें संथाल परगना की समृद्ध पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और जनजातीय परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ जनजातीय विरासत के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा।

136 साल पुराना है हिजला मेला का इतिहास

हिजला मेला केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दुमका की ऐतिहासिक विरासत है।इसकी नींव ब्रिटिश काल के दौरान 1890 में रखी गई थी।समय के साथ इस मेले के साथ ‘जनजातीय’ शब्द जुड़ा, जो इसकी मूल पहचान को दर्शाता है। तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इस मेले के महत्व को देखते हुए इसे ‘राजकीय मेला’ का दर्जा प्रदान किया था।मयूराक्षी नदी के तट पर लगने वाला यह मेला आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button