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Jharkhand :रिम्स में महिला नर्स के साथ मारपीट की घटना के बाद अस्पताल की नर्सिंग सेवा हुई बंद

राँची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मेडिसिन विभाग में इलाज के दौरान मरीज के परिजनों द्वारा एक महिला नर्स के साथ मारपीट और अभद्रता के बाद अस्पताल की नर्सिंग सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

‘मंत्री का आदमी’ होने की धौंस और मारपीट

पीड़ित नर्स अनुपम ने आरोप लगाया कि मेडिसिन डिपार्टमेंट में डॉ. अभय के अधीन उपचाराधीन मरीज हबीब अंसारी के परिजनों ने उनके साथ न सिर्फ गाली-गलौज की, बल्कि उन पर शारीरिक हमला भी किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिजनों ने खुद को “मंत्री का आदमी” बताते हुए नर्स को जान से मारने की धमकी दी और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

सेवाएं ठप: ट्रॉमा सेंटर के बाहर नर्सों का हल्ला बोल

घटना के विरोध में रिम्स की तमाम नर्सें एकजुट हो गई हैं और ट्रॉमा सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गई हैं। नर्सिंग स्टाफ ने काम पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे अस्पताल की ओपीडी और जनरल वार्डों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। नर्सों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगी।

सुरक्षा पर सवाल: “कब तक सहेंगे गाली और मारपीट?”

नर्सिंग यूनियन ने आरोप लगाया कि रिम्स प्रबंधन सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति करता है। प्रदर्शनकारी नर्सों ने कहा हम दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन बदले में हमें गालियाँ और मारपीट मिलती है। अस्पताल प्रशासन ऐसी घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेता, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अगर हम अस्पताल के अंदर सुरक्षित नहीं हैं, तो हम सेवा कैसे दे पाएंगे?

मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, प्रबंधन मौन

अचानक हुई इस हड़ताल के कारण रिम्स में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है। कई गंभीर मरीजों को समय पर दवा और इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। इस पूरे मामले पर रिम्स प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक कार्रवाई या ठोस आश्वासन सामने नहीं आया है, जिससे आंदोलनकारी नर्सों का गुस्सा और बढ़ गया है।

नर्सिंग यूनियन की मुख्य मांगें

नर्स अनुपम के साथ मारपीट करने वाले आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी।ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा देने के लिए ‘मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ का सख्ती से पालन।संवेदनशील वार्डों में सुरक्षाकर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी।

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