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Uttar Pradesh: मणिकर्णिका घाट जाने पर अड़े सपा सांसद और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, आवास के बाहर धरने पर बैठे वीरेंद्र सिंह

वाराणसी: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में रविवार को राजनीतिक पारा उस वक्त चढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को मणिकर्णिका घाट जाने से पुलिस ने रोक दिया। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता घाट की ओर कूच करने वाले थे, लेकिन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में बैरिकेडिंग कर दी और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

सांसद आवास के बाहर ही धरने पर बैठे

कार्यकर्ताओं को रोके जाने और नेताओं की नजरबंदी से नाराज सपा सांसद वीरेंद्र सिंह अर्दली बाजार स्थित टैगोर टाउन कॉलोनी में अपने आवास के बाहर ही कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है।

“सरकार आखिर कौन-सा सच छिपाना चाहती है?” – वीरेंद्र सिंह

धरने पर बैठे सांसद वीरेंद्र सिंह ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर हमारा 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट जाकर वहां मूर्तियों के तोड़े जाने का सच जानना चाहता था। प्रशासन ने पहले अनुमति दी थी, लेकिन बाद में हमें घर में नजरबंद कर दिया गया। मैं जैसे ही बाहर निकला, पुलिस ने मुझे रोक दिया। आखिर घाट पर जाने से रोकने के पीछे मंशा क्या है? प्रशासन कौन-सा सच छिपाना चाहता है?

पुलिस का पक्ष: प्रदर्शन के आह्वान के कारण रद्द हुई अनुमति

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीतू कात्यायन ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। पुलिस के अनुसार पहले प्रशासन द्वारा अनुमति दी गई थी, लेकिन इसी बीच सपा के अन्य नेताओं द्वारा लहुराबीर पर प्रदर्शन का आह्वान कर दिया गया।सुरक्षा कारणों और टकराव की स्थिति को टालने के लिए अनुमति को स्थगित किया गया है।फिलहाल जिलाधिकारी और सपा नेतृत्व के बीच बातचीत जारी है।

कई नेता नजरबंद, नक्कास में भी हंगामा

प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कोतवाली थाना क्षेत्र के नक्कास इलाके में सपा नेता लालू यादव को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया। शहर के अन्य हिस्सों में भी सपा कार्यकर्ताओं को घाट की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कई थानों की फोर्स लगा रखी है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 11 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया था, जिसे मणिकर्णिका घाट पहुंचकर वहां मूर्तियों के साथ हुई कथित छेड़छाड़ या तोड़फोड़ की वास्तविकता का पता लगाकर रिपोर्ट सौंपनी थी। इसी को लेकर आज सपा कार्यकर्ता गोलबंद हुए थे।

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