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Madhya Pradesh: गणतंत्र दिवस पर ‘दागी’ शिक्षक का सम्मान, शिक्षा विभाग हैरान

बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान हुए एक सम्मान समारोह ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संकुल केंद्र कन्या गंज की प्राथमिक शाला मरामझिरी में पदस्थ शिक्षक सुभाष सिंह ठाकुर को ‘उत्कृष्ट सेवा’ के लिए सम्मानित किए जाने पर न केवल विवाद छिड़ गया है, बल्कि शिक्षा विभाग ने भी इस नाम से अपना पल्ला झाड़ लिया है।

क्या है विवाद: ‘उत्कृष्ट सेवा’ या ‘विवादास्पद रिकॉर्ड’?

शिकायतकर्ता रामेश्वर लक्षणे ने मंगलवार को कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में इस सम्मान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, जिस शिक्षक को मंच से सम्मानित किया गया, उनका पिछला रिकॉर्ड बेहद विवादास्पद रहा है। आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और पालकों की शिकायतों पर सुभाष सिंह ठाकुर को पूर्व में दो बार निलंबित किया जा चुका है। मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी के दोषी पाए जाने पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उनका एक स्थायी इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) भी रोका गया था।उन पर अनुशासनहीनता और कार्य में लापरवाही की कई शिकायतें दर्ज हैं।

शिक्षा विभाग की सफाई: “हमने तो नाम ही नहीं भेजा”

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा शिक्षा विभाग की ओर से हुआ है। विभाग का दावा है कि जिला स्तरीय सम्मान के लिए उनकी ओर से किसी भी शिक्षक का नाम प्रस्तावित ही नहीं किया गया था।जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र वरकड़े ने स्पष्ट किया विभाग की तरफ से 26 जनवरी के लिए किसी भी शिक्षक का नाम सम्मान हेतु नहीं भेजा गया था। मंच से नाम घोषित होने पर विभाग के अधिकारी खुद हैरान रह गए। उन्हें कैसे सम्मानित कर दिया गया, इसकी जानकारी हमें नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जाँच शुरू कर दी गई है।

जाँच के घेरे में ‘गुप्त’ सिफारिश

शिक्षा विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब विभाग ने कोई नाम नहीं भेजा, तो शिक्षक सुभाष सिंह ठाकुर का नाम अंतिम चयन सूची में किसके माध्यम से शामिल हुआ।क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में यह नाम जोड़ा गया?क्या कलेक्ट्रेट स्तर पर सूची तैयार करने में भारी प्रशासनिक चूक हुई?क्या किसी अधिकारी ने पद का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से नाम घुसाया?

सम्मान वापस लेने और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता रामेश्वर लक्षणे ने कलेक्टर से मांग की है कि ऐसे दागी शिक्षक का सम्मान तुरंत निरस्त किया जाए। साथ ही, उन अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए जिन्होंने नियमों की अनदेखी कर एक विवादास्पद व्यक्ति का नाम अनुशंसित किया।

प्रशासनिक साख पर सवाल

गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामयी अवसर पर बिना विभागीय अनुशंसा के किसी को सम्मानित किया जाना जिले की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा दाग लगा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि दागी लोगों को सम्मान मिलेगा, तो निष्ठा से कार्य करने वाले कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा।

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