Jharkhand: टाटा पावर में हड़ताल की आहट, ठेका मजदूरों के उत्पीड़न पर भड़की यूनियन

जमशेदपुर: टाटा पावर जोजोबेड़ा प्लांट में ठेका श्रमिकों के कथित उत्पीड़न और प्रबंधन की ‘हठधर्मिता’ को लेकर औद्योगिक अशांति के संकेत मिल रहे हैं। टाटा पावर मजदूर यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे जल्द ही हड़ताल पर जा सकते हैं। इस संबंध में शनिवार को यूनियन की एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है।
डीएलसी कार्यालय में प्रबंधन की अनुपस्थिति से आक्रोश
मामला तब तूल पकड़ गया जब गुरुवार को उप श्रम आयुक्त अरविंद कुमार के कार्यालय में आयोजित त्रिपक्षीय बैठक में टाटा पावर प्रबंधन और ठेका एजेंसी आरके इरेक्टर का कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। यूनियन के उपाध्यक्ष सह एटक के प्रदेश अध्यक्ष अंबुज ठाकुर के नेतृत्व में लगभग 50 मजदूर अपना पक्ष रखने डीएलसी कार्यालय पहुँचे थे। प्रबंधन द्वारा न तो कोई जवाब दाखिल किया गया और न ही कोई अधिकारी वहां पहुँचा, जिससे मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया।
ट्रांसफर और छंटनी की धमकी का आरोप
अंबुज ठाकुर ने डीएलसी को बताया कि आरके इरेक्टर एजेंसी के तहत पिछले 15 वर्षों से कार्यरत दो मजदूरों, पवन कुमार एवं संजीव प्रसाद, को दुर्भावनापूर्ण तरीके से जोजोबेड़ा पावर प्लांट से पावर हाउस-7 (बिष्टुपुर) ट्रांसफर कर दिया गया है। मजदूरों ने शिकायत की है कि ट्रांसफर के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।विरोध करने पर काम से निकालने की धमकी दी जा रही है।नियमानुसार उन्हें पे-स्लिप और ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।
“हठधर्मिता दिखा रहा है प्रबंधन”: अंबुज ठाकुर
डीएलसी अरविंद कुमार से मुलाकात के दौरान अंबुज ठाकुर ने कहा कि सरकारी नोटिस का जवाब न देना टाटा पावर और ठेका प्रबंधन की हठधर्मिता को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसी और मुख्य नियोजक (टाटा पावर) के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
शनिवार को होगा आर-पार का निर्णय
अंबुज ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट रहा है। शनिवार को यूनियन की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सर्वसम्मति से हड़ताल पर जाने की तिथि और रणनीति तय की जाएगी।इस विरोध प्रदर्शन और बैठक में एटक के कोल्हान प्रमंडल उप महासचिव हीरा अरकने, धनंजय शुक्ला सहित दर्जनों मजदूर मुख्य रूप से शामिल थे।



