Jharkhand: बोड़ाम में ‘काड़ा लड़ाई’ के दौरान उग्र भैंसे ने पिता-पुत्र को रौंदा, पिता की मौत -बेटा गंभीर

पटमदा/बोड़ाम: बोड़ाम थाना क्षेत्र के बेलडीह पंचायत स्थित जोबा गांव में सोमवार को ‘काड़ा (भैंसा) लड़ाई’ प्रतियोगिता के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। मैदान में चल रही भैंसों की भिड़ंत के दौरान एक उग्र भैंसे ने दर्शकों के बीच खड़े पिता-पुत्र पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में 55 वर्षीय सुभाष कर्मकार की मौत हो गई, जबकि उनका 15 वर्षीय बेटा सागर कर्मकार गंभीर रूप से घायल है।
खेल बना खूनी: मैदान से बाहर निकलकर किया हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे मैदान में दो भैंसों के बीच जोरदार लड़ाई चल रही थी। इसी बीच एक भैंसा दूसरे को खदेड़ते हुए अचानक रिंग से बाहर दर्शकों की भीड़ की ओर भागने लगा।भागने के क्रम में उग्र भैंसे ने जोबा निवासी सुभाष कर्मकार को अपने सींगों से उठाकर पटक दिया और उन्हें बुरी तरह कुचल दिया।पिता को बचाने आए पुत्र सागर पर भी भैंसे ने हमला किया, जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई। दोनों घायलों को तुरंत एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान सुभाष कर्मकार ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।
संवेदनहीनता: मौत के बाद भी जारी रहा मेला
सूत्रों के मुताबिक, इस भयानक हादसे के बाद भी मेला कमेटी की संवेदनहीनता बरकरार रही। एक व्यक्ति के लहूलुहान होने के बावजूद आयोजन नहीं रोका गया और अगले दो जोड़ों की लड़ाई करवाई गई। दोपहर ढाई बजे जब बोड़ाम पुलिस को इसकी भनक लगी, तब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा और मेले को जबरन बंद करवाया।
गुप्त तरीके से सोशल मीडिया पर ‘बुलावा’
भैंसा लड़ाई पर देशभर में प्रतिबंध के बावजूद इस क्षेत्र में यह खेल फल-फूल रहा है। थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने बताया कि पुलिस को इस आयोजन की कोई सूचना नहीं दी गई थी।
“मेला कमेटी ने गुप्त तरीके से इसका आयोजन किया था। आयोजकों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” – थाना प्रभारी
आयोजन का तरीका:
प्रशासन से बचने के लिए कमेटी कोई पर्चा या पोस्टर नहीं छपवाती। इसके बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए ‘काड़ा लड़ाई’ प्रेमियों को सूचित किया जाता है। अक्सर ये आयोजन दो थाना क्षेत्रों या दो राज्यों (झारखंड-बंगाल) की सीमा पर किए जाते हैं ताकि भनक लगने पर दूसरे क्षेत्र का फायदा उठाकर बचा जा सके। सोमवार को भी जोबा गांव का फुटबॉल मैदान पटमदा और बोड़ाम की सीमा पर होने के कारण चुना गया था।
परिजनों में कोहराम, क्षेत्र में आक्रोश
अचानक हुई इस घटना से सुभाष कर्मकार के परिवार में मातम छा गया है। ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि प्रतिबंध के बावजूद ऐसे खतरनाक खेलों का आयोजन क्यों हो रहा है, जो मासूमों की जान ले रहे हैं।



