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Bihar: एम्स पटना में 50 लाख के गबन का खुलासा, चीफ कैशियर निलंबित

पटना: बिहार के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान , पटना में करीब 50 लाख रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। संस्थान के प्रशासन ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए चीफ कैशियर अनुराग अमन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही संस्थान ने उच्च स्तरीय विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

नियमित ऑडिट में पकड़ी गई चोरी

जानकारी के अनुसार, यह पूरी धोखाधड़ी एम्स की नियमित आंतरिक ऑडिट के दौरान पकड़ी गई। ऑडिट टीम जब संस्थान के वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही थी, तब उन्हें कैश बुक, भुगतान रजिस्टर और बैंक खातों के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिला। जांच में कई ऐसे नकद लेन-देन पाए गए, जिनके लिए न तो कोई रसीद थी और न ही संबंधित विभाग की स्वीकृति। संस्थान की रसीदों और वास्तविक बैंक बैलेंस के बीच लगभग 50 लाख रुपये का अंतर पाया गया, जिससे गबन की आशंका पुख्ता हो गई।

जांच में चौंकाने वाला खुलासा: ‘निवेश’ के नाम पर हेराफेरी?

सूत्रों के हवाले से जो प्रारंभिक जानकारी मिल रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई है कि सरकारी राशि को कथित तौर पर कहीं बाहर निवेश किया गया था।दावा किया गया है कि आरोपी अधिकारी ने पैसे को लाभ कमाने के उद्देश्य से कहीं निवेश किया था और बाद में उसे लौटाने की योजना थी। हालांकि, एम्स प्रशासन इन दावों की स्वतंत्र जांच कर रहा है कि क्या यह राशि पहले भी इसी तरह निजी लाभ के लिए इस्तेमाल की गई थी।

प्रशासन का कड़ा रुख: बर्खास्तगी की लटक रही तलवार

एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए निलंबित अधिकारी को सभी वित्तीय जिम्मेदारियों से दूर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। विभाग इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और जरूरत पड़ने पर मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपने पर भी विचार कर रहा है।

मरीजों की सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर

संस्थान के निदेशक और प्रशासनिक अधिकारियों ने मरीजों और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया है कि इस प्रकरण का असर अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। संस्थान का रोजमर्रा का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इंटरनल ऑडिट सिस्टम को और अधिक सख्त और डिजिटल करने की योजना बनाई जा रही है।

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