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Madhya Pradesh: इंदौर में 20 मौतों के बाद हाईकोर्ट ने घोषित किया ‘हेल्थ इमरजेंसी’,जल जीवन मिशन की रिपोर्ट में डरावने खुलासे

इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, वहीं केंद्र सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में पानी की शुद्धता को लेकर डरावनी तस्वीर पेश की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है।

भागीरथपुरा त्रासदी: एक मोहल्ला जो श्मशान बन गया

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी काल बनकर आया। अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है। वर्तमान में 429 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 16 मरीज आईसीयू ) में और तीन वेंटिलेटर पर जीवन-मौत के बीच जूझ रहे हैं।हाईकोर्ट ने अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि “साफ पानी पाना जीवन का मौलिक अधिकार है” और प्रशासन की विफलता ने इस अधिकार का हनन किया है।

जल जीवन मिशन की रिपोर्ट: चौंकाने वाले आंकड़े

4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ के अनुसार, मध्य प्रदेश में ग्रामीण जलापूर्ति का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।राज्य के केवल 63.3% पानी के नमूने ही मानकों पर खरे उतरे, जबकि राष्ट्रीय औसत 76% है। यानी 36.7% ग्रामीण आबादी अनजाने में बैक्टीरिया और रसायनों से युक्त ‘जहरीला’ पानी पी रही है।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही माइक्रोबायोलॉजिकल जांच में पास हुए। यानी 88% अस्पतालों में मरीजों को इलाज के नाम पर दूषित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में भी 26.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं।

इंदौर: 100% नल कनेक्शन, फिर भी 67% पानी असुरक्षित

सरकारी कागजों में इंदौर जिला 100% नल कनेक्शन वाला घोषित है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और है। रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर के केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पानी मिल रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि केवल पाइप बिछा देना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

इन जिलों में स्थिति सबसे भयावह

आदिवासी बाहुल्य जिलों में जल संकट ने मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है।अनूपपुर और डिंडोरी में एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया।बालाघाट, बैतूल और छिंदवाड़ा: यहाँ 50% से अधिक पानी के स्रोत दूषित हैं। एमपी के केवल 31.5% घरों में नल कनेक्शन हैं, जो राष्ट्रीय औसत (70.9%) के आधे से भी कम है।

केंद्र की चेतावनी: फंड में हो सकती है कटौती

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश की इस स्थिति को “सिस्टम द्वारा जनित आपदा” करार दिया है। केंद्र ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता और सप्लाई व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो राज्य के जल बजट (फंड) में भारी कटौती की जा सकती है।

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