
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की सड़कों पर नगर निगम और उससे जुड़ी ठेका कंपनियों की अवैध, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खुलेआम मौत का कारण बन रही हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम की 700 से अधिक गाड़ियां ऐसी हैं, जिन पर न तो नंबर है और न ही पंजीकरण, बीमा या फिटनेस जैसी अनिवार्य औपचारिकताएं। पिछले पांच वर्षों में ऐसी गाड़ियों से कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी सवाल खड़े करती है।
बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहीं 700 से ज्यादा गाड़ियां
नगर निगम की ट्रैक्टर-ट्रॉली, छोटा हाथी, हाईवा, जेसीबी, पिकअप, ट्रक सहित करीब 700 से अधिक वाहन बिना पंजीकरण या अवैध तरीके से सड़क पर उतर रहे हैं।इन गाड़ियों में न नंबर प्लेट,न पंजीकरण,न फिटनेस,न टैक्स और न बीमा।इसके बावजूद ये गाड़ियां शहर की हर सड़क पर बेतहाशा दौड़ रही हैं और प्रशासन आंख बंद किए हुए है।
निजी ठेका कंपनियों की गाड़ियां भी नियमों की धज्जियां उड़ाती हुई
सिर्फ नगर निगम ही नहीं, बल्कि जिन निजी कंपनियों को सफाई और कूड़ा उठाने का ठेका मिला है, वे भी बिना नंबर प्लेट और अवैध वाहनों को सड़कों पर उतार रही हैं।इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है—इसका स्पष्ट जवाब किसी विभाग या अधिकारी के पास नहीं है।
पांच साल में सात मौतें, कई घायल—पर कार्रवाई शून्य
बिना नंबर वाले इन वाहनों ने पिछले पांच वर्षों में सात लोगों को कुचल कर मार दिया, लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।घायल लोगों का तो कोई रिकॉर्ड तक नहीं।परिवार तबाह होते रहे और नगर निगम, पुलिस और आरटीओ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर खामोश बैठे रहे।
पुलिस और आरटीओ की नज़रें क्यों नहीं पड़तीं इन वाहनों पर?
लोग सवाल उठा रहे हैं—आम लोगों का दोपहिया बिना नंबर प्लेट दिख जाए तो पुलिस तुरंत चालान करती है।लेकिन नगर निगम और उसकी गठजोड़ वाली कंपनियों की सैकड़ों अवैध गाड़ियां बेधड़क शहर में घूम रही हैं, फिर भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
आखिर कौन सी अदृश्य ढाल है जो इन वाहनों को सुरक्षा दे रही है?
आरटीओ को करोड़ों रुपये टैक्स और जुर्माने का नुकसान हो चुका है, लेकिन विभाग कार्रवाई करने को तैयार नहीं। ऐसा लगता है जैसे कानून केवल जनता के लिए है, सरकारी विभागों के लिए नहीं।
नंबर जारी, लेकिन नंबर प्लेट लगाने की जहमत नहीं
कुछ वाहनों के नंबर पंजीकृत हैं, लेकिन वे नंबर प्लेट लगाने तक की मुश्किल नहीं उठाते।ऐसे में यदि कोई गाड़ी किसी को टक्कर मार दे, तो सीसीटीवी फुटेज में उसकी पहचान तक नहीं हो सकती।ये वाहनों के जरिए कानून को खुली चुनौती है।
नगर निगम की चुप्पी और विभागों की नाकामी उजागर
नगर निगम के अधिकारी भी जानते हैं कि उनकी 700 से अधिक गाड़ियां नियम विरुद्ध चल रही हैं, लेकिन न कोई कदम उठाया गया और न ही उन्हें रोकने का आदेश जारी हुआ।नतीजा यह है कि सड़क पर उतरते ही ये वाहन लोगों के लिए चलती फिरती मौत बन जाते हैं।
वर्जन: हमने नई गाड़ियों का पंजीकरण कराया है — मुख्य अभियंता
मनोज प्रभात, मुख्य अभियंता, केंद्रीय कार्यशाला नगर निगम का कहना है—“जिन गाड़ियों का पंजीकरण नहीं है, वे मेरे आने से पहले की हैं। इनमें से लगभग 70% गाड़ियां खराब हालत में खड़ी हैं। पूर्व में पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया, यह हम नहीं बता सकते। हमने 25-30 नई गाड़ियां खरीदी हैं और उनका पंजीकरण करा दिया गया है।”



